सन्तानहीन योग, रोग योग

सन्तानहीन योग, रोग योग


सन्तानहीन योग

  • पंचमेश नीच का हो।
  • पंचमेश तथा सप्तमेश नीच के हों।
  • तृतीयेश और चन्द्रमा 1, 4, 6, 10वें स्थान पर हों।
  • बुध और लग्नेश लग्न के अलावा अन्य स्थानों पर हों।
  • 5, 8 या 12वें स्थानों में पापग्रह हों।
  • 5वें भाव में चन्द्रमा तथा 8, 12वें स्थान पर पापग्रह हों।
  • 7वें में स्थान पर शुक्र, 10 में चन्द्र तथा 4 में तीन पापग्रह हों।
  • 5वें स्थान में राहु व बृहस्पति हों।
  • पंचमेश नीच का होकर अष्टम घर का हो।

रोग योग

  • षष्ठेश सूर्य के साथ 1 या 8वें भाव में हो, तो मुखरोग।
  • षष्ठेश चन्द्र के साथ 1 या 8वें भाव में हो, तो तालुरोग।
  • 12वें भाव में गुरु और चन्द्र साथ हों। . मंगल और शनि का योग 6 या 12वें भाव में हो।
  • लग्नेश रवि का योग 6,8 व 12वें स्थान में हो।
  • मंगल और शनि लग्न स्थान या लग्नेश को देखते हों।
  • सूर्य, मंगल तथा शनि-तीनों जिस स्थान में हों, उस स्थान वाले अंग पर रोग होता है।
  • पापी मंगल पापराशि में हो।
  • शुक्र और मंगल में सूर्य का योग हो।
  • अष्टमेश और लग्नेश साथ हों।
  • छठे स्थान पर शनि की पूर्ण दृष्टि हो।
  • चन्द्र और शनि एक साथ कर्क राशि में हों।
  • छठे भाव में चन्द्र, शनि और बुध हों, तो जातक कोढ़ी होता है।
  • अष्टमेश नीच ग्रहों के बीच में हो।
  • सूर्य पापग्रह द्वारा दृष्ट हो।

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राज योग

  • April 27th, 2020

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